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एक छोटी सी कविता हमारे फोजी भाइयों के लिये

आज इस बक्त पुरा देश शोक के माहौल में है । पुलबामा में जो आत्मघाती  हमला हुआ और उसमें जो जो हमारे CRPF के जवान शहीद हुए है उनसे पूरा देश में शोक का माहौल है । हर भारतीय इस बक्त यही चाहता है कि जो हमारे जवान शहीद हुए उनके खून का बदला लिया जाए । हमारे शहीद फोजी भाईओं को शत शत प्रणाम्।

एक छोटी सी कविता फोजी भइयों के नाम

                             
A Poem For Indian Army

मा तुम्हारा लड़का रन में अभी घायल हुआ है,
मा तुम्हारा लड़का रन में अभी घायल हुआ है,
    देख उसकी बीरता शत्रु भी कायल हुआ है
    रक्त की होली रचाए लहू से लहूलुहान है ,
  रक्त की होली रचाए मैं प्रलय कर दिख रहा हु ।
  एक गोली सीने पे अभी तोड़ी देर पहले ही लगी है,
  मा कसम दी थी जो  तुमने आज पूरी की है,
  तो छा रहा है लो सामने लो आंखों के अँधेरा ,
  पर उसमें ही दिख रहा है मुझको नूतन सबेरा ।
  कह रहे हैं शत्रु भी जिस तरह में साझा हुआ हूं,
  लग रहा है शिंगनी कि कोक से पैदा हुआ हूं।
 मा ये मत समझना कि मैं नींद लेने जा रहा हु ,
मा तुम्हारी  कोक से फिर जन्म लेने आ रहा हु।
  में तुम्हे बचपन में ही बहुत दुख दे चुका हूं ,
 और कंधों पे खड़ा हो  आसमां सर पे ले चुका हूं,
तुम सदा कहते ना थे तुम्हे ये ऋण भरना पड़ेगा,
 एक दिन कंधे पे ले  मुझको तुझे चलना पड़ेगा ,
पर पिता में भार अपना तनिक हलका ना कर पाया,
   तू मुझे करना क्षमा में पितृ ऋण भर ना पाया ।
 सुन अनुज रनबीर  गोली बाह में जब आ समाई ,
 ओ मेरी बाईं भुजा मुझे उस बक्त तेरी याद आई,
अब में तुझे बाहों से आसमा दिखा सकता नही ,
लौट कर भी आऊंगा बिशबाश दे सकता नही हूं,
पर अनुज बिशबाश रखना में  थक कर नही हटूंगा ,
तुम भरोशा पुर्ण रखना सांस अंत तक लड़ूंगा ।
 अब तुम्ही को सौंपता हूं बस ख्याल बहन का रखना,
जब पड़े उसको जरूरत बक्त पर सम्मान करना,
तुम उसको करना रक्षा पर्ब जब भी आएगा ,
भाई अम्बर में नजर आशीष देता आएगा।
अंत में प्रिये आज भी तुमसे कूछ मांगता हूं ,
है कठिन देना पर निष्ठुर हृदय मांग रहा हूं।
जनता हु बालकों के प्रशन अभी सुलझे ना होंगे ,
सैंकड़ो ही प्रशन  होंगे जिनमे बो उलझे होंगे ।
की पूछते होंगे कि पापा है कहा कब घर आएंगे ,
और हमको साथ लेकर घूमने कब जाएंगे ,
पापा हमे छोड़ कर जाने कहा बैठे हैं ,
क्या उन्हें मालूम है हम उनसे रूठे हुए हैं ।
तब उन्हें समझना कि यू रुठ जाते नही ,
जो ज्यादा जिद करते हैं उनके पापा घर आते नही ।
शादी के सात फेरों से तुम मेरी अर्धांग्नी हो ,
सात जन्मों तक रहोगी तुम अमर ओ रागनी हो,
इसलिए अधिकार तुममसे बिन बताए ले रहा हूं,
मांग का सहिन्दूरर तेरा मातृभू को दे रहा  हूँ ।
एक छोटी सी कविता हमारे फोजी भाइयों के लिये एक छोटी सी कविता हमारे फोजी भाइयों के लिये Reviewed by Raj Kumar on February 15, 2019 Rating: 5

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